सोनांचल बस स्टैंड बचाने की लड़ाई को मिला सियासी समर्थन, व्यापारियों के पक्ष में उतरे पूर्व विधायक केदारनाथ शुक्ला, 35 साल पुराने बस स्टैंड को तोड़ने का विरोध, छोटे दुकानदारों की रोजी-रोटी पर संकट; कमेटी बनाकर आंदोलन आगे बढ़ाने की तैयारी

सीधी। शहर के सोनांचल बस स्टैंड को लेकर छोटे व्यापारियों और फुटपाथी दुकानदारों का आंदोलन अब सियासी समर्थन के साथ तेज होता नजर आ रहा है। वर्षों से बस स्टैंड परिसर में दुकान लगाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले व्यापारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। इसी बीच वरिष्ठ पूर्व विधायक केदारनाथ शुक्ला व्यापारियों की सभा में पहुंचे और उनकी लड़ाई में साथ खड़े होने का भरोसा दिलाया। सभा को संबोधित करते हुए वे व्यापारियों की पीड़ा सुनकर भावुक हो गए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 35 साल पुराने सोनांचल बस स्टैंड को ध्वस्त करने की कार्रवाई वे जीते-जी नहीं होने देंगे।
बस स्टैंड बंद होने से कारोबार प्रभावित, परिवार चलाना मुश्किल
सोनांचल बस स्टैंड पर दुकान लगाने वाले छोटे व्यापारियों का कहना है कि बसों का संचालन बंद होने से उनके कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ा है। सुबह से शाम तक दुकान खोलने के बावजूद बिक्री नहीं हो रही है। ऐसे में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। व्यापारियों के मुताबिक, बस स्टैंड से बसों का संचालन होने के कारण ही उनकी दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही बनी रहती थी। अब बसों का संचालन दूसरी जगह से होने के कारण उनकी रोजी-रोटी पर संकट मंडराने लगा है।
व्यापारियों का कहना है कि वे किसी बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान के मालिक नहीं हैं, बल्कि छोटी-छोटी दुकानें चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। यदि बस स्टैंड की वर्तमान व्यवस्था समाप्त कर दी जाती है, तो उनके सामने रोजगार का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। इसी समस्या को लेकर व्यापारी लगातार अपनी आवाज उठा रहे हैं।
दूसरी जगह बनाया जा सकता है शॉपिंग कॉम्प्लेक्स : केदारनाथ शुक्ला

व्यापारियों की सभा में पहुंचे पूर्व विधायक केदारनाथ शुक्ला ने कहा कि सोनांचल बस स्टैंड करीब 35 साल पुराना है और वर्तमान में भी उपयोग के लायक है। ऐसे में इसे तोड़कर बसों का संचालन दूसरी जगह से शुरू करना उचित नहीं है। इससे न केवल छोटे दुकानदारों का कारोबार प्रभावित होगा, बल्कि आसपास के बाजार पर भी इसका असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण करना है, तो उसके लिए किसी अन्य स्थान का चयन किया जा सकता है। पुराने बस स्टैंड को समाप्त करने से उन लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा होगा, जो वर्षों से यहां कारोबार कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं।
पूर्व विधायक ने पुराने बस स्टैंड से दोबारा बसों का संचालन शुरू कराने के लिए कमेटी गठित कर आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात कही। उन्होंने व्यापारियों को भरोसा दिलाया कि उनके हितों की लड़ाई में वे साथ खड़े रहेंगे। सभा के दौरान व्यापारियों की समस्याएं सुनते हुए वे भावुक भी हो गए।
आंदोलन को लेकर बनेगी समिति

सोनांचल बस स्टैंड को बचाने के लिए लगातार आंदोलन कर रहे कांग्रेस के अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के पूर्व प्रदेश संयोजक ने कहा कि यह किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उन लोगों की सभा थी, जो बस स्टैंड से जुड़े फैसले के कारण परेशान हैं। उन्होंने बताया कि व्यापारियों की ओर से कुछ लोग पूर्व विधायक केदारनाथ शुक्ला के पास गए थे। उनके आग्रह पर पूर्व विधायक सभा में पहुंचे और व्यापारियों की समस्याएं सुनीं।
उन्होंने कहा कि आगे की लड़ाई लड़ने के लिए समिति गठित की जाएगी और आंदोलन को संगठित तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
बस स्टैंड का मुद्दा ले सकता है राजनीतिक तूल
सोनांचल बस स्टैंड से बसों का संचालन बंद होने के बाद शुरू हुआ विवाद अब छोटे व्यापारियों के रोजगार और शहर के बाजार से जुड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। आंदोलनरत व्यापारियों को पूर्व विधायक केदारनाथ शुक्ला का समर्थन मिलने के बाद इस मामले में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ने की संभावना है।
अब देखना होगा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं और प्रशासन छोटे व्यापारियों की समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाता है। फिलहाल व्यापारियों की मांग पुराने बस स्टैंड से दोबारा बसों का संचालन शुरू कराने की है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि व्यापारियों का आंदोलन क्या रुख लेता है और उनकी मांगों पर कोई सहमति बन पाती है या नहीं।
